Bank NPA क्या होता है

हेल्लो दोस्तों आज के इस आर्टिकल में हम जानेगे की NPA क्या होता है ? Banking सेक्टर में NPA का क्या अर्थ है। NPA की Full Form Non Performing Assets है

 पिछले दो चार सालों में बैंक के NPA नॉन परफॉर्मिंग ऐसेट (Non Performing Assets) बहुत बढ़ गए हैं। स्पेशल पब्लिक सेक्टर बैंक के। तो आज हम NPA को समझेंगे और बैंक का एनालिसिस करते वक्त एनपीए क्यों इम्पोर्टेन्ट होता है इसके बारे में बात करेंगे।

बैंक का NPA कम कैसे होता है:-

बैंक ने किसी को दिया हुआ लोन बैंक के लिए Assets होता है क्योंकि वो लोन बैंक को इंटरेस्ट यानी ब्याज के रूप में इनकम कम कर देता है। वहीं जिसने बैंक से लोन लिया है उसके लिए वो लाइबिलिटी होती है, क्योंकि आगे चलकर उसको वो लोन बैंक को वापस करना होता है।

जब लोन का इंटरेस्ट और प्रिंसिपल अमाउंट टाइम पर चुकाए जाते हैं तो उनको स्टैंडर्ड ऐसेट कहते हैं। अगर जिन्होंने बैंक से लोन लिया है, वो लोन की इन्सटॉलमेंट यानी किस्त इन्सटॉलमेंट भरने की तारीख से 90 दिन तक नहीं करते हैं तो उसके बाद उस लोन को NPA यानि Non Performing Assets कहा जाता है।

ऐग्रीकल्चरल और कुछ स्पेसिफिक लोन के लिए एनपीए के अलग अलग क्राइटीरिया होते हैं। लोन पर मिल रहा इंटरेस्ट बैंक के लिए इनकम होता है और जब कोई लोन बैंक के लिए इनकम जनरेट करना बंद कर देता है तो वह लोन बैंक के लिए एनपीए बन जाता है।

कई बार लोन लेने वाले की पूरी जांच किए बिना उन्हें लोन दिया जाता है तो कई बार पॉलिटिकल पार्टी के जान पहचान से लोन दिए जाते हैं जिसमें लेने वाले का पूरा वेरिफिकेशन नहीं किया जाता या कोई ऐसा एसेट्स गिरवी नहीं रखे जाते हैं, जिससे एनपीए बढ़ने का ख़तरा होता है।

Types Of NPA:-

  • sub standard assets
  • Doubtful Assets
  • Loss Assets

बैंक को एनपीएस को तीन कैटेगरीज में क्लासिफाइ करना होता है। sub standard assets, Doubtful Assets, Loss Assets में। जो लोन 12 महीने या उससे कम टाइम पीरियड के लिए NPA होते है।

उन्हें सब स्टैंडर्ड ऐसेट कहा जाता है और अगर उन्होंने 1 साल से ज्यादा टाइम पीरियड के लिए एनपीए रहता है तो उसमें डाउटफुल ऐसेट की कैटेगरी में रखा जाता है। डाउटफुल ऐसेट मतलब? वो लोग जिनकी वसूली के चान्सेस बहुत कम है।

बैंक OverDraft फैसिलिटीज प्रोवाइड करती है और OverDraft में भी एमपी होता है। OverDraft की फैसिलिटीज जेनरली करेंट अकाउन्ट में प्रोवाइड की जाती है जिसमें आपके बैंक अकाउन्ट में जीतने पैसे है।

अब बैंक ने आपको प्रोवाइड की हुई ओवर ड्रॉफ्ट लिमिट तक उससे ज्यादा पैसे निकाल सकते हो। अगर किसी कंपनी ने ओर ड्रॉप लिया है और वो ड्रॉप चुकाने की तारीख के बाद 90 दिन तक कंपनी ऑर्डर नहीं चुकाती है तो उसके बाद वो ओवर ड्रॉफ्ट नॉन परफॉर्मिंग ऐसेट बन जाएगा।

 कोई लोन एनपीए होने पर पैसा वसूल करने के लिए बैंक अलग अलग तरीके यूज़ करती है जैसे कि लोन लेने वाले ने जो भी चीज़ को लेटरल यानी गिरवी रखी है, उसे बेचकर पैसे रिकवर करना। अगर किसी ने अपनी कंपनी के शेयर बैंक के साथ गिरवी रखकर लोन लिया है, तो लोन न चुकाने पर बैंक शेयर्स को बेचकर पैसे रिकवर करती है।

और बैंक कई बार लोन न चुकाने पर कंपनी को NCLT  नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल खींचती है जहाँ पर कंपनी को लिक्विडेट करके यानी कंपनी के सारे assets भेजकर या पूरी कंपनी को बेचकर बैंक अपने पैसे रिकवर करती है। पर ज्यादातर टाइम बैंक कंपनी की लिक्विडेशन के जरिए अपने पूरे पैसे रिकवर नहीं कर पाती।

अगर लोन अनसिक्योर्ड है यानी बैंक ने बिना कोई चीज़ गिरवी रखे लोन दिया है, जैसे की पर्सनल लोन और अनसिक्योर्ड लोन को अगर कोई पे नहीं करता है तो उसे रिपीट करना बैंक के लिए बहुत मुश्किल जाता है।

इसलिए बैंक का मेन फोकस यही रहना चाहिए कि एनपीए कम से कम कैसे रखा जाए क्योंकि एनपीए का कंपनी के फाइनैंशल हेल्थ पर बहुत असर पड़ता है। ज्यादा NPA की  वजह से बैंक के पास फंड की कमी हो सकती है।

जिसका उनकी लोन देने की कपैसिटी पर फर्क पड़ सकता है। ज्यादा एनपीएस की वजह से हाल ही में IDBI बैंक ने कॉर्पोरेट लोन देना बंद कर दिया है तो एनपीए से बैंक की आर्थिक हालत पता करने में मदद होती है।

इसलिए बैंक का एनालिसिस करते वक्त NPA देखना बहुत ज़रूरी है। दोस्तों आज का यह आर्टिकल कैसा लगा। और आपका कोई प्रशन या सुझाव है तो आप हमें कमेंट करके जरुर बतना।

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